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बिहार

जहाँ बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ

फ़ोटो: Bpilgrim, CC BY-SA 2.5
राजधानी

पटना

घूमने का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से मार्च

कैसे पहुँचें

पटना या गया के लिए उड़ान लें। बोधगया, गया जंक्शन से 15 किमी दूर है, और राजगीर व नालंदा एक-दूसरे के पास हैं।

आदर्श यात्रा

मुख्य जगहें देखने के लिए 6 से 8 दिन

बिहार के बारे में

बिहार में बौद्ध इतिहास के कुछ सबसे अहम स्थल और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर हैं। प्राचीन भारतीय इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह यात्रा बेहद सार्थक है।

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बिहार की प्रमुख जगहें

महाबोधि मंदिर, बोधगयाफ़ोटो: Bpilgrim, CC BY-SA 2.5

महाबोधि मंदिर, बोधगया

यूनेस्को सूचीबद्ध यह मंदिर उस स्थान पर है जहाँ सिद्धार्थ गौतम को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ।

सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्चठहराव: गया2 दिनआध्यात्मिकविरासत
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महाबोधि विहार या महाबोधि मन्दिर, बोध गया स्थित प्रसिद्ध बौद्ध विहार है। यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया है।यह विहार उसी स्थान पर खड़ा है जहाँ गौतम बुद्ध ने ईसा पूर्व 6वी शताब्धिं में ज्ञान प्राप्त किया था।

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नालंदाफ़ोटो: Odantapuribs, CC BY-SA 4.0

नालंदा

दुनिया के सबसे पुराने आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक के ईंटों के खंडहर, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।

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नालंदा प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विख्यात केन्द्र था। महायान बौद्ध धर्म के इस शिक्षा-केन्द्र में हीनयान बौद्ध-धर्म के साथ ही अन्य देशों के छात्र पढ़ते थे। वर्तमान बिहार राज्य में पटना से 85.5 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और राजगीर से 11.5 किलोमीटर उत्तर में एक गाँव के पास अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा खोजे गए इस महान बौद्ध विश्वविद्यालय के भग्नावशेष इसके प्राचीन वैभव का बहुत कुछ अंदाज़ करा देते हैं।

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राजगीरफ़ोटो: Photo Dharma, CC BY 2.0

राजगीर

रोपवे से पहुँचा जाने वाला पहाड़ी पर विश्व शांति स्तूप, गर्म पानी के सोते और बुद्ध व महावीर दोनों से जुड़े स्थल।

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राजगीर मगध भारत के बिहार राज्य के नालंदा ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। यह कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी, जिससे बाद में मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ।

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पटनाफ़ोटो: Nandanupadhyay, CC BY-SA 3.0

पटना

प्राचीन पाटलिपुत्र, जहाँ तख़्त श्री पटना साहिब, बिहार संग्रहालय और गोलघर अन्नागार हैं।

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पटना भारत का एक ऐतिहासिक शहर है, और बिहार राज्य की राजधानी है। यह बिहार का सबसे बड़ा नगर है। पटना का प्राचीन नाम पाटलिपुत्र, पुष्पपुरी और कुसुमपुर था। मुगल शासन के दौरान इस शहर का नाम 'अज़ीमाबाद' था।

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पावापुरीफ़ोटो: Sumitsurai, CC BY-SA 4.0

पावापुरी

जहाँ भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया, कमल तालाब में बना सफ़ेद जल मंदिर।

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पावापुरी, जिसे पावा भी कहा जाता है, भारत के बिहार राज्य के नालंदा ज़िले जिले में राजगीर और बोधगया के समीप स्थित एक स्थान है। यह जैन धर्म के मतावलंबियो के लिये एक अत्यंत पवित्र शहर है भगवान महावीर को यहीं मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। यहाँ के जलमंदिर की शोभा देखते ही बनती है। संपूर्ण शहर कैमूर की पहाड़ी पर बसा हुआ है।

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वैशालीअनछुई जगहफ़ोटो: Amaan Imam, CC BY-SA 4.0

वैशाली

एक प्राचीन गणराज्य जहाँ बुद्ध ने अपना अंतिम उपदेश दिया, और जहाँ आज भी अशोक स्तंभ खड़ा है।

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वैशाली बिहार प्रान्त के वैशाली जिला में स्थित एक गाँव है। ऐतिहासिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध यह गाँव मुजफ्फरपुर से अलग होकर १२ अक्टुबर १९७२ को वैशाली के जिला बनने पर इसका मुख्यालय हाजीपुर बनाया गया। मगही,वज्जिका यहाँ की मुख्य भाषा है। ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार वैशाली में ही विश्व का सबसे पहला गणतंत्र यानि "रिपब्लिक" कायम किया गया था। भगवान महावीर की जन्म स्थली होने के कारण जैन धर्म के मतावलम्बियों के लिए वैशाली एक पवित्र स्थल है। भगवान बुद्ध का इस धरती पर तीन बार आगमन हुआ, यह उनकी कर्म भूमि भी थी।

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विक्रमशिलाअनछुई जगहफ़ोटो: Prataparya, CC BY-SA 3.0

विक्रमशिला

भागलपुर के पास पाल काल के महान बौद्ध विश्वविद्यालय के खंडहर और विशाल क्रॉस आकार का स्तूप।

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विक्रमशिला महाबिहार भारत का एक प्रसिद्ध शिक्षा-केन्द्र था। नालन्दा महाविहार और विक्रमशिला दोनों पाल राजवंश के राज्यकाल में शिक्षा के लिए जगत्प्रसिद्ध थे। वर्तमान समय में बिहार के भागलपुर जिले का अन्तिचक गाँव वहीं है जहाँ विक्रमशिला थी। इसकी स्थापना ८वीं शताब्दी में पाल राजा धर्मपाल ने की थी। अब इस विश्वविद्यालय के केवल खण्डहर ही अवशेष हैं। मान्यता है कि बख्तियार खिलजी नामक मुस्लिम आक्रमणकारी ने सन ११९३ के आसपास इसका विध्वंश कर दिया था।

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वाल्मीकि नेशनल पार्कअनछुई जगहफ़ोटो: Praanshu, CC BY-SA 4.0

वाल्मीकि नेशनल पार्क

बिहार का इकलौता टाइगर रिज़र्व, नेपाल सीमा पर साल का जंगल, जीप सफ़ारी और नदी किनारे ठहरने की सुविधा।

सबसे अच्छा समय: नवंबर से मईठहराव: वाल्मीकि नगर2 दिनवन्यजीवप्रकृति
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वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान भारत के बिहार राज्य के पश्चिमी चम्पारण ज़िले में स्थित बाघ संरक्षण को समर्पित एक राष्ट्रीय उद्यान है। यह बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है। सन् 2018 में यहाँ बाघ की अनुमानित संख्या 40 थी।

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ज़रूर चखें

लिट्टी चोखा, सत्तू पराठा, सिलाव का खाजा, मालपुआ, चंपारण मीट

कहाँ ठहरें

पटना, बोधगया और राजगीर में ठहरने के सबसे अच्छे विकल्प हैं

घूमना-फिरना

ट्रेनें पटना, गया और भागलपुर को जोड़ती हैं; बौद्ध सर्किट के लिए कार किराये पर लें

काम की बातें

बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली को एक बौद्ध सर्किट यात्रा में जोड़ें। सर्दियाँ सुहानी होती हैं, गर्मियाँ बहुत तेज़।

बिहार का इतिहास

भारत में बहुत कम स्थान ऐसे हैं जिन्होंने प्राचीन इतिहास में बिहार जितनी केंद्रीय भूमिका निभाई हो। गंगा के किनारे स्थित चिरांद जैसे पुरातात्विक स्थल नवपाषाण काल में बसे हुए खेतिहर समुदायों की मौजूदगी दिखाते हैं। छठी शताब्दी ईसा पूर्व तक यह क्षेत्र शक्तिशाली राज्यों का घर था, जिनमें मगध राज्य और वज्जि संघ शामिल थे, जिसकी राजधानी वैशाली को अक्सर दुनिया के शुरुआती गणराज्यों के उदाहरणों में गिना जाता है। मगध की पहली राजधानी राजगीर थी, जो पहाड़ियों और प्राचीन पत्थर की दीवारों से घिरी थी, जिनके निशान आज भी देखे जा सकते हैं।

बिहार दो विश्व धर्मों की उत्पत्ति से गहराई से जुड़ा है। सिद्धार्थ गौतम ने बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया और बुद्ध बने, और उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में उपदेश देते हुए बिताया। बोधगया का महाबोधि मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और दुनिया भर के बौद्धों का तीर्थ केंद्र है। 24वें जैन तीर्थंकर वर्धमान महावीर का जन्म वैशाली के पास हुआ और उन्होंने पावापुरी में निर्वाण प्राप्त किया, जो आज भी एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल है।

मगध भारत के पहले बड़े साम्राज्यों का केंद्र बनकर उभरा। राजधानी पाटलिपुत्र, यानी आज के पटना, में स्थानांतरित हुई, और चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। उनके पौत्र अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में उपमहाद्वीप के बड़े हिस्से पर शासन किया और बौद्ध धर्म का संदेश फैलाया। मौर्यकालीन अवशेषों में चमकदार पॉलिश वाले शैलकृत कक्षों वाली बराबर गुफाएँ और पटना के कुम्हरार में खुदाई से मिला स्तंभों वाला सभागार शामिल हैं। सदियों बाद, मगध में ही स्थित गुप्त वंश ने लगभग चौथी शताब्दी ईस्वी से कला और ज्ञान के स्वर्ण युग का नेतृत्व किया। गुप्त काल में स्थापित नालंदा महाविहार एशिया के महान शिक्षा केंद्रों में से एक बना और ह्वेनसांग जैसे विद्वानों को आकर्षित किया। इसके खंडहर अब यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। पाल राजाओं के समय विक्रमशिला एक और प्रसिद्ध मठीय विश्वविद्यालय बना।

12वीं शताब्दी के अंत में हुए हमलों के बाद नालंदा और विक्रमशिला का पतन हो गया, और यह क्षेत्र दिल्ली सल्तनत और बाद में क्षेत्रीय शासकों के अधीन आ गया। 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी, जिनके परिवार की जागीर सासाराम में थी, ने कुछ समय के लिए मुग़लों को सत्ता से हटा दिया और एक कुशल प्रशासन खड़ा किया। सासाराम में उनका भव्य मकबरा हिंद-इस्लामी स्थापत्य के बेहतरीन उदाहरणों में से एक है। मुग़लों के समय पटना एक महत्वपूर्ण प्रांतीय केंद्र था। दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 1666 में पटना में हुआ था, और तख़्त श्री पटना साहिब उनके जन्मस्थान को चिह्नित करता है।

1764 में बक्सर की लड़ाई में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की जीत ने उसे बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर नियंत्रण दिला दिया। 1857 में जगदीशपुर के वृद्ध कुँवर सिंह ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ दृढ़ विद्रोह का नेतृत्व किया। 1917 में महात्मा गांधी ने नील किसानों के समर्थन में चंपारण में भारत में अपना पहला बड़ा सत्याग्रह शुरू किया, और आगे चलकर बिहार ने स्वतंत्रता आंदोलन में मज़बूत भूमिका निभाई। भारत के पहले राष्ट्रपति बने डॉ. राजेंद्र प्रसाद बिहार से ही थे।

1912 में बिहार को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग करके बिहार और उड़ीसा प्रांत बनाया गया, और 1936 में उड़ीसा एक अलग प्रांत बन गया। आज़ादी के बाद बिहार पटना को राजधानी बनाकर भारत का एक राज्य बना। 2000 में इसके दक्षिणी ज़िलों को अलग करके नया राज्य झारखंड बनाया गया, जिससे बिहार को उसकी वर्तमान सीमाएँ मिलीं।

बिहार: झटपट जवाब

बिहार घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

अक्टूबर से मार्च

बिहार कैसे पहुँचें?

पटना या गया के लिए उड़ान लें। बोधगया, गया जंक्शन से 15 किमी दूर है, और राजगीर व नालंदा एक-दूसरे के पास हैं।

बिहार के लिए कितने दिन चाहिए?

महाबोधि मंदिर, बोधगया, नालंदा, राजगीर जैसी ख़ास जगहें देखने के लिए 6 से 8 दिन की योजना बनाएँ।

बिहार में क्या खाना ज़रूर चखें?

लिट्टी चोखा, सत्तू पराठा, सिलाव का खाजा, मालपुआ, चंपारण मीट

बिहार में कहाँ ठहरें?

पटना, बोधगया और राजगीर में ठहरने के सबसे अच्छे विकल्प हैं

पड़ोसी राज्य

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